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Thursday, 14 January 2016

बवासीर के घरेलु नुस्खे

by Amar Ujala Now  |  in कविताये at  04:03
बवासीर (piles) का घरेलु उपचार बवासीर की बीमारी को पाइल्स भी कहते है, यह कभी भी किसी को भी हो सकती है| विशेषकर ये 50 की उम्र के बाद होती है| बवासीर मल में होने वाली परेशानी है, जो एक खतरनाक बीमारी है जो इन्सान को काफी कष्ट देती है| बवासीर बीमारी 2 तरह की होती है –
  • अंदरूनी – इसमें नस की सुजन दिखाई नहीं पढ़ती लेकिन उसे महसूस किया जा सकता है|
  • बाहरी – इसमें सुजन गुदे से साफ तौर पर दिखाई देती है|
बवासीर में मलद्वार वाली जगह में खून की नसों में सुजन आ जाती है| जिससे इन्सान को नियमित कार्य करने में मुश्किल का सामना करना पड़ता है|

बवासीर के कारण (bawaseer ke karan) 
  • अनियमित दिनचर्या
  • अधिक तेल मसाले व मिर्च वाला खाना
  • पानी कम पीना
  • अनुवांशिक
बवासीर के लक्षण (bawaseer ke lakshan)
  • मलाशय में दर्द
  • शौच के समय खून आना
  • खुजली
  • चक्कर आना
  • थकान
  • भूख ना लगना
  • कब्ज
यह बीमारी होने पर अधिकतर लोग डॉक्टर को दिखाने से कतराते है, शर्म के चलते वो कतराते है और फिर परेशानी बढती चली जाती है| इस परेशानी को हम घर पर आराम से ठीक कर सकते है| मैं आज आपको बवासीर को ठीक करने करने के घरेलु उपचार बताती हूँ|
बवासीर का घरेलु नुस्खे (bawasir ke gharelu nuskhe)
  1. बर्फ – बर्फ बवासीर का पहला व सरल उपाय है| यह खून के स्त्राव को कम कर, सुजन भी कम करता है व दर्द में भी आराम मिलता है|
  • बर्फ को कपड़े में लपेटकर प्रभावित जगह में रखें व 10 min तक सिकाई करें| दिन में कई बार ऐसा करें आराम मिलेगा|
  1. एलोवेरा – एलोवेरा एक नेचुरल तरीका है| एलोवेरा से खुजली जलन कम होती है| यह बहरी व अंदरूनी दोनों तरह की बवासीर को ठीक करता है|
  • एलोवेरा से उसका gel निकालकर प्रभावित एरिया में लगाकर मसाज करें, इससे जलन कम होगी|
  • इसके अलावा एलोवेरा को काट कर फ्रीजर में रखें अब इस ठंडी एलोवेरा से प्रभावित जगह पर सिकाई करें|
  1. नीम्बू का रस – नीम्बू में बहुत सारे पोषक तत्व होते है, जो बवासीर की बीमारी में रहत देता है|
  • कॉटन को नीम्बू के रस में डालें फिर इसे प्रभावित स्थान में लगायें, शुरू में थोड़ी जलन महसूस होगी लेकिन थोड़ी ही देर आपको राहत मिलेगी|
  • इसके अलावा 1 कप गर्म दूध में आधा नीम्बू का रस मिलाएं, और तुरंत पी लें| हर 3 घंटे में ऐसा करें पूरी तरह से आराम मिलेगा|
  • आधी- आधी चम्मच नीम्बू का रस, अदरक का रस, पुदीने का रस व शहद मिलाएं| दिन में 1 बार इसे पियें|
  1. ओलिव आयल – ओलिव आयल एंटीऑक्सीडेंट प्रॉपर्टीज होती है, जो बाहरी बवासीर को ठीक करने में सहायक है| यह सुजन वाली खून की नसों को ठीक करता है, जिससे सुजन कम होती है व खून का संचालन सही होता है|
  • 1 चम्मच ओलिव आयल रोज खाना चाइये, आप इसमें सब्जी बनाकर या सलाद में मिलाकर खा सकते है|
  1. almond आयल – बादाम का तेल भी बाहरी बवासीर में आराम देता है| pure बादाम के तेल में कॉटन भिगो कर प्रभावित जगह में लगायें| ये स्किन को moisture देगा जिससे स्किन में होने वाला खिंचाव खुजली कम होगी| दिन में कई बार ये प्रक्रिया दोहराएँ|
  2. जीरा  आधा चम्मच भुना पीसा हुआ जीरा को 1 ग्लास गुनगुने पानी में डाल कर दिन में 2-3 बार पियें|
इसके अलावा छाछ में भी जीरा मिला कर पी सकते है| दिन में जितनी बार प्यार लगे पानी की जगह छाछ पियें| 3-4 दिन में खून की नसों में सुजन कम हो जाएगी और बवासीर से आराम मिलेगा|
  1. गुठली – जामुन व आम की गुठली को सुखाकर पीस लें, अब इस चूर्ण को छाछ या गुनगुने पानी के साथ 1 चम्मच लें|
  2. किशमिश  मुट्ठी भर किशमिश को पानी में रात भर भिगोयें| अगले दिन सुबह किशमिश को पानी में मसल लें अब खली पेट इसे खाएं| रोजाना ऐसा करें कुछ दिन में ही आराम मिलेगा|
  3. दालचीनी  आधी चम्मच से भी कम दालचीनी के पाउडर को चम्मच शहद में मिलाएं व रोज एक बार लें| आराम मिलेगा|
  4. अन्य उपाय 
  • बवासीर से बचने के लिए जितना हो सकते तरल पदार्थ ले, पानी तो दिन में 8-10 ग्लास जरुर पियें|
  • ताजे फल व उसका जूस पियें|
  • ताज़ी रेशेदार सब्जियां खाएं, सूप पियें|
  • फाइबर युक्त खाना अधिक से अधिक लें|
  • तेल व मसाले वाला खाना बिल्कुल ना खाएं|
  • अंजीर, खजूर फाइबर युक्त मेवे रोज सुबह खाया करें|
बवासीर के लक्षण होने पर आप ये नुस्खे अपनाएं| ये आपको जल्द आराम देंगे| अगर आपकी तकलीफ ठीक नहीं हो रही है आप डॉक्टर के पास जाने से ना कतराएँ| डॉक्टर आपको सही दवा व तरीका बताएगा| आपके उपर ये घरेलु नुस्खे कितने कारीगर हुए हमें जरुर शेयर करें|

बाल दिवस महत्व पर निबंध कविता

by Amar Ujala Now  |  in त्यौहार at  02:50
बच्चे ही किसी देश का भविष्य होते हैं ,उनका विकास देश के विकास को मजबूती देता हैं जितना शक्तिशाली देश के बच्चा होता हैं उतना ही उस देश का युवा प्रभावशील बनता  हैं और उतना ही उज्ज्वल उस देश का भविष्य होता हैं इसलिए हमारे देश में प्रति वर्ष बाल दिवस मनाया जाता हैं |यह दिन एक राष्ट्रिय त्यौहार बाल दिवस के रूप में बच्चो को समर्पित किया गया हैं |

Bal diwas Mahatva Nibandh Essay kavita Poem Hindi

बाल दिवस महत्व पर निबंध कविता

  • बाल दिवस कब मनाया जाता हैं ?
Children’s day विश्व स्तर पर भी मनाया जाता हैं जिसकी दिनांक 20 नवंबर हैं इसकी घोषणा 1 जून 1950 में  Women’s International Democratic Federation द्वारा की गई थी |विभिन्न देशों में भिन्न- भिन्न तारीख पर यह दिन मनाया जाता हैं | भारत देश में यह दिन 14 नवंबर को मनाया जाता हैं |
बाल दिवस पंडित जवाहरलाल नेहरु के जन्म दिवस 14 नवंबर के दिन मनाया जाता हैं | जवाहरलाल नेहरु स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री थे और वे बच्चों को बहुत पसंद करते थे इसलिए ही बच्चे उन्हें चाचा नेहरु कह कर पुकारते थे |
नेहरु परिवार ने देश की आजादी में भरपूर योगदान दिया और इसी का परिणाम रहा कि उन्हें देश वासियों ने बहुत पसंद किया और वे इस लोकतान्त्रिक देश के प्रथम प्रधानमंत्री बने |
चाचा नेहरु को बच्चों से विशेष प्रेम था | वे अपना समय बच्चो के बीच बिताना बहुत पसंद करते थे और बच्चे भी इनके साथ सहज महसूस करते थे आसानी से इनसे जुड़ जाते थे अपने दिल की बात इनसे कर पाते थे इसलिए बाल दिवस के लिए नेहरु जी के जन्म दिवस से अच्छा कोई मौका नहीं हो सकता था |
  • बाल दिवस इतिहास children’s Day history
विश्व स्तर पर बाल दिवस मनाये जाने का प्रस्ताव श्री वी कृष्णन मेनन द्वारा दिया गया था जिसके बाद सबसे पहली बार बाल दिवस अक्टूबर में मनाया गया | सभी देशों में इसे मनाये जाने एवम स्वीकृति मिलने के बाद संयुक्त महा सभा द्वारा 20 नवंबर को अन्तराष्ट्रीय बाल दिवस की घोषणा की गई |
बच्चो के अधिकारों के हनन को रोकने के लिये संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा उनके अधिकारों की भी घोषणा की गई और उसी के आधार पर बाल दिवस मनाये जाने की बात को पुरे विश्व ने स्वीकार किया |
भारत देश में कई बाल श्रमिक हैं जबकि हमारे देश में 18 वर्ष से कम की आयु के बच्चो को किसी भी तरह का काम करने की इजाजत नहीं हैं | बाल अधिकारों को सामने रखने के लिए तथा उनके प्रति सभी को जगाने के लिए बाल दिवस का होना जरुरी हैं | इस एक दिन के कारण सरकार एवम अन्य लोगो का ध्यान इस ओरे करना जरुरी हैं | इस एक दिन से इस समस्या का समाधान आसान नहीं हैं लेकिन इस ओर सभी के ध्यान को केन्द्रित करने के लिए इस एक दिन का होना जरुरी हैं |
बच्चे ही देश का भविष्य होते हैं अगर वे पढने लिखने की उम्र में काम करेंगे आजीविका के लिए खून पसीना एक करेगे तो देश का भविष्य अंधकारमय हो जायेगा | सामान्य शिक्षा सभी का हक़ हैं और उसे ग्रहण करना आज के बच्चो का कर्तव्य बभी होना चाहिये तब ही देश का विकास संभव हैं |
बाल दिवस एक ऐसा आईना होना चाहिये जिसके जरिये सभी को बालको के अधिकार का पता चले और इसका हनन करने वालों को इस बात की गहराई का पता चले कि वे किस प्रकार देश के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं | तभी बाल दिवस का होना कारगर सिद्ध होगा |
  • कैसे मनाया जाता हैं ?
भारत देश में बड़ी धूमधाम से बाल दिवस मनाया जाता हैं | इस दिन पंडित नेहरु को श्रधांजलि दी जाती हैं |बच्चो के चहेते चाचा नेहरु के जीवन के पन्नो को आज के दिन पलटा जाता हैं आने वाली पीढ़ी को आजादी के लिए दिये गये इनके योगदान के बारे में बताया जाता हैं |
विभिन्न तरीको से बाल दिवस मनाया जता हैं :
  • विशेषकर विद्यालयों में बाल दिवस के उपलक्ष्य में आयोजन किये जाते हैं | कई तरह की प्रतियोगिता रखी जाती हैं |
  • कई तरह के नाटकों का आयोजन किया जाता हैं, नृत्य, गायन एवम भाषण का भी आयोजन किया जाता हैं |
  • बच्चो के लिए खासतौर पर मनाये जाने वाले इस त्यौहार में बच्चों को उनके अधिकारों, उनके कर्तव्यों के बारे में अवगत कराया जाता हैं |
  • छोटे-छोटे बच्चों के मनोरंजन के लिये पिकनिक एवम कई खेल कूद का आयोजन किया जाता हैं |
  • इस दिन रेडियो पर भी कई तरह के कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं जो बच्चो को मार्गदर्शन प्रदान करते हैं |
इस तरह पुरे देश में स्कूल ,सरकारी संस्थाओं एवम कॉलोनी में बाल दिवस का त्यौहार मनाया जाता हैं | बच्चो के उत्साह को बढ़ाने के लिये कई प्रतियोगिता रखी जाती हैं जिससे उनके अंदर के कई गुणों का पता चलता हैं |और इसी से बच्चों का सर्वांगिक विकास होता हैं |
  • कविता :
आता हैं हर वर्ष ये पल
झूमे नाचे बच्चे संग-संग
देते चाचा नेहरु को श्रद्धांजलि
थे यह देश के पहले प्रधानमंत्री
करते थे बच्चों से प्यार
हर जयंती पर होता बच्चो का सत्कार
कच्ची मिट्टी हैं बच्चो का आकार
सच्चे साँचे में ढले यही हैं दरकार
ना हो अन्याय से भरा इनका जीवन
प्रतिज्ञा करो न करोगे बाल शोषण
नन्ही सी कलि हैं ये
भारत का खिलता कमल हैं ये
बाल दिवस पर हैं इन्हें सिखाना
जीवन अनमोल हैं यूँही ना गँवाना
देश के भविष्य हो तुम
शक्तिशाली युग की ताकत हो तुम
इस कविता के माध्यम से यही सन्देश देना चाहती हूँ कि बाल दिवस केवल एक त्यौहार नहीं हैं इस दिन बच्चों को उनके अधिकार और कर्तव्य सिखाना हम नागरिकों का फर्ज हैं ताकि देश का भविष्य उज्जवल हो सके | सबसे पहले हमें खुद को बाल दिवस का महत्व समझाना हैं ताकि हम बच्चो का शोषण ना करे और ना होने दे | जब तक देश के बच्चे स्वस्थ एवम शिक्षित नहीं होते तब तक एक अच्छे देश की कल्पना व्यर्थ हैं |

भारतीय किसान दिवस महत्व निबंध भाषण एवम कविता

by Amar Ujala Now  |  in निबंध at  02:10
देश में किसान की स्थिती दयनीय हैं | उनके लिए सिर्फ एक दिन नहीं बल्कि हमेशा ही जागकर सोचने और कुछ करने का समय हैं क्यूंकि हम सभी अपने विकास के लिए एक दुसरे पर निर्भर हैं | आइये जाने कब मनाया जाता हैं किसान दिवस ?

Bharatiya Kisan Diwas Nibandh speech hindi

किसान दिवस निबंध भाषण

भारत का अधिकांश आय स्त्रोत कृषि हैं और कृषि का अभिन्न अंग हैं किसान |किसान एक ऐसा मजदूर हैं जो मेहनत करके भी दुखी हैं मजबूर हैं | आज भारत में सबसे दयनीय हालत किसान की हैं | देश की आजादी के बाद से हर स्थिती में सुधार आया लेकिन किसान के स्तर में कोई सुधार नहीं |इनकी स्थिती हर बीतते वर्ष के साथ दयनीय होती जा रही हैं | किसान देश की नींव हैं जब इस नींव पर संकट आता हैं तो देश की आधार शिला हिल जाती हैं | आर्थिक व्यवस्था कम्पित हो जाती हैं |आज सबसे ज्यादा जरुरत हैं कि कैसे किसान एवम किसानी के स्तर को उपर उठाया जाये ? कैसे देश को इस दिशा में आत्म निर्भर बनाया जाये ? कृषि पृकृति पर निर्भर करती हैं और पृकृति किसी भी विज्ञान के द्वारा वश में नहीं की जा सकती | अन्ततः इसके आगे सभी को घुटने टेकने ही पड़ते हैं |

kisan diwas is celebrated in India in the memory of

  • राष्ट्रीय किसान दिवस

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह जो कि किसान थे और किसानो की धड़कन कहे जाते थे | उनके जन्म दिवस को किसान दिवस के रूप में मनाया जाता हैं |
 किसान दिवस 23 दिसम्बर को मनाया जाता हैं |

किसान दिवस संक्षिप्त विवरण

चौधरी चरण सिंह किसानो के नेता थे | उन्होंने अपने जीवन के हर कार्य में किसानो को महत्व दिया | इनकी अर्थव्यवस्था में किसान सर्वोपरी थे |इन्होने यह स्पष्ट कर दिया था कि किसान ही देश की धरा और धरा को मजबूती देना सरकार का अहम् कर्तव्य हैं | शायद इसलिए ही इन्हें जवाहरलाल नेहरु जी की आर्थिक नीति में विश्वास कम था इसलिए इनके बीच सदैव मतभेद की स्थिती रहती थी | इसी कारण इन्होने 1967 में अपनी एक नयी पार्टी का गठन किया जिसका चुनाव चिन्ह उन्होंने “हलदार” तय किया |
1किसान दिवस तिथी23 दिसम्बर
2इस दिन का चुनाव क्यूँ किया गया ?23 दिसम्बर देश के पांचवे प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह का जन्म दिवस हैं और यह किसान के मसीहा के रूप में जाने जाते हैं |
3कब की गई किसान दिवस की स्थापनावर्ष 2001
4कैसे मनाया जाता हैं किसान दिवस·       उत्तर प्रदेश में इस दिन छुट्टी होती हैं
·       किसान के प्रति जनता एवम सरकार को जागरूक किया जाना लक्ष्य होता हैं
·       किसानो को आधुनिकता के प्रति प्रेरित किया जाता हैं |
प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह जीवन परिचय |
  • किसान दिवस की स्थापना कब की गई ?

वर्ष 2001 में भारतीय सरकार द्वारा किसान दिवस की घोषणा की गई जिसके लिए चौधरी चरण सिंह जयंती से अच्छा मौका नहीं था अतः उनके कार्यो को ध्यान में रखते हुए 23 दिसम्बर को भारतीय किसान दिवस की घोषणा की गई | तब ही से प्रति वर्ष 23 दिसम्बर किसान दिवस के रूप में मनाया जाता हैं |

Kisan Diwas Mahatva

  • किसान दिवस महत्व :

सुनने में कई लोगो को अजीब लगता हैं कि किसान दिवस की क्या आवश्यक्ता हैं लेकिन इस बात को एक जश्न में रूप में ना देखे | सभी महत्वपूर्ण दिवस हमारा उस तरफ ध्यान ले जाने के लिए बनाये जाते हैं | देश के युवा एवम महानगर निवासी अपनी निजी जिन्दगी में इस तरह व्यस्त हैं कि उन्हें देश की स्थिती का भान ही नहीं हैं |वे यह बात समझ ही नहीं पा रहे हैं कि देश किस तरह से कृषि पर निर्भर करता हैं ? कैसे किसान की जिन्दगी उनके लिए भी महत्वपूर्ण हैं ? यह सभी बाते समझने एवम उन पर विचार करने के लिए आज के युवा के पास समय ही नहीं हैं ऐसे में किसान दिवस उन्हें यह सोचने पर मजबूर करता हैं और शायद केवल इस एक दिन के कारण देश का ध्यान इस ओर जाता हैं |
दूसरा दृष्टिकोण उन किसानो के लिए हैं जो अपने आपको निसहाय महसूस कर रहे हैं | कहीं न कहीं किसान दिवस उनमे एक उम्मीद का दीपक जलाता हैं | उन्हें यह अहसाह होता हैं कि वे अकेले नहीं हैं | देश उनके साथ खड़ा हैं |

Kisan Diwas Celebration Kaise Manate hain

किसान दिवस कैसे मनाया जाता हैं ?

  • किसान दिवस के दिन उत्तरप्रदेश में छुट्टी रहती हैं देश का अधिकांश किसान उत्तर भारत से हैं | चौधरी चरण सिंह भी वही के थे इसलिए यह दिवस वहाँ बड़ी धूम धाम से मनाया जाता हैं |
  • किसान दिवस के दिन उन नेताओं को सम्मानित किया जाता हैं जिन्होंने देश के किसान के विकास के लिए उचित कार्य किये हो |
  • इस दिन कृषि संबंधी कई वर्कशॉप, सेमिनार का आयोजन किया जाता हैं जिसके जरिये किसानो को आधुनिक कृषि एवम आने वाली आपदाओ से कैसे राहत मिले इस तरह की जानकारी विस्तार से दी जाती हैं |
  • किसान दिवस के दिन कृषि वैज्ञानिक किसानों से बातचीत करते हैं उनकी समस्या को सुन उसका हल देते हैं |
  • इस दिन किसानो को एक बेहतर और आधुनिक कृषि का ज्ञान दिया जाता हैं साथ ही उन्हें इस ओर प्रेरित किया जाता हैं |
  • किसान दिवस के दिन किसानो को उनके हक़ और उन्हें दी जाने वाली सुविधाओं के बारे में भी विस्तार से बताया जाता हैं |
इस प्रकार हर एक प्रान्त में अलग – अलग तरह से किसान दिवस का आयोजन किया जाता हैं |
  • Kisan Diwas Par Kavita

किसान दिवस पर कविता

जिनके अनाज के भंडार हैं 
पर खाने को दाना नहीं
जिनके आँगन में दुग्ध बहे 
पर उसने कभी चखा नहीं
मेहतन ही उसकी ताकत हैं 
फिर भी वो आज भिखारी हैं 
अनाज का हैं वो दाता  
फिर भी सोता भूखा हैं
वह मेहनत की ही खाता हैं 
पर पृकृति का गुलाम हैं 
आस लगाये वो आसमान निहारे 
लेकिन भाग्य में उसके शाम हैं
साहूकार ने रही सही 
सांसे भी उससे छीन ली 
सियासी और कालाबजारी ने 
उसकी जिन्दगी दूभर करी
फिर भी वो उठता हैं 
मेहनत करते जाता हैं 
एक दिन आएगा फिर से 
जब किसान ही लहरायेगा 
कब तक रूठेगी तू पृथ्वी 
तुझे वो मेहनत से ही मनायेगा
Kisan Diwas Date Nibandh Mahatva speech kavita hindi भारतीय किसान दिवस महत्व निबंध भाषण एवम कविता जरुर पढ़े |किसान दिवस के दिन हर एक व्यक्ति को यह सोचना चाहिये कि देश केवल स्वहित से ही आगे नहीं बढ़ सकता | देश के विकास के लिए नींव का मजबूत होना जरुरी हैं इसलिए सभी देश वासियों को किसान की स्थिती बेहतर करने के लिये अपना योगदान देना चाहिए और किसान परिवार को भी अपने आने वाली पीढ़ी को शिक्षित करने का प्राण लेना चाहिये |

सरदार वल्लभ भाई पटेल जयंती निबंध, जीवनी, नारे, कविता

by Amar Ujala Now  |  in निबंध at  01:31
Sardar Vallabhbhai Patel Jayanti Essay History Jeevani Quotes Hindi Kavita सरदार वल्लभ भाई पटेल जयंती निबंध, जीवनी, नारे, कविता आदि के द्वारा उनके जीवन परिचय का समावेश इस लेख में किया गया हैं कैसे एक साधारण मनुष्य लोह पुरुष बना इसका जवाब इस आर्टिकल में आपको जरुर मिलेगा|

सरदार वल्लभभाई पटेल जयंती निबंध 

Sardar Vallabhbhai Patel Essay History in Hindi

सरदार वल्लभभाई पटेल एक ऐसा नाम जो जब भी किसी बुजुर्ग जिसने स्वतंत्रता आन्दोलन को प्रत्यक्ष रूप से देखा था, के ज़हन में आता हैं उनका शरीर नव उर्जा से भर जाता हैं लेकिन मन में एक आत्म ग्लानि सी उमड़ पड़ती हैं क्यूंकि उस वक्त का हर एक युवा वल्लभभाई को ही प्रथम प्रधानमंत्री के रूप में देखना चाहता था लेकिन अंग्रेजो की नीति, गांधीजी के निर्णय एवम नेहरु जी के हठ के कारण यह सपना सच न हो सका |
वल्लभभाई पटेल लोह पुरुष के रूप में पहचाने जाते हैं | एक शूरवीर से कम इनकी ख्याति न थी | इन्होने 200 वर्षो की गुलामी के फँसे देश के अलग- अलग राज्यों को संगठित कर भारत में मिलाया और इस बड़े कार्य के लिए इन्हें सैन्य बल की जरुरत तक नहीं पड़ी |यही इनकी सबसे बड़ी ख्याति थी जो इन्हें सभी से पृथक करती हैं |

Sardar Vallbhabhai Patel Short Life Introduction 

सरदार वल्लभभाई पटेल  के जीवन की झलकियाँ 
1जन्म-मृत्यु31 अक्टूबर 1875 – 15 दिसम्बर 1950
2जन्म-मृत्यु स्थाननाडियाड- बॉम्बे
3पिताझावर भाई
4मातालाड़ बाई
5पत्नी का नामझवेरबाई
6भाइयों के नामसोम भाई, बिट्ठल भाई, नरसीभाई
7बहन का नामदहिबा
8बेटादह्याभाई
9बेटीमणिबेन
10पॉलिटिकल करियर1.   1917 में बोरसाद में एक स्पीच के जरिये इन्होने लोगो को जागृत किया और गाँधी जी का स्वराज के लिए उनकी लड़ाई में सहमति पत्र पर हस्ताक्षर करने के लिए प्रेरित किया |
2.   खेडा आन्दोलन में अहम् भूमिका निभाई एवम अकाल और प्लेग से ग्रस्त लोगो की सेवा की |
3.   बारडोली सत्याग्रह में इन्होने लोगो को कर ना देने के लिए प्रेरित किया और एक बड़ी जीत हासिल की जहाँ से इन्हें सरदार की उपाधि मिली |
4.   असहयोग आन्दोलन में गाँधी जी का साथ दिया | पुरे देश में भ्रमण कर लोगो को एकत्र किया और आन्दोलन के लिए धन राशी एकत्र की |
5.   भारत छोड़ो आन्दोलन में भाग लिया और जेल गए |
6.   आजादी के बाद देश के गृहमंत्री एवं उपप्रधानमंत्री बने |
7.   इस पद पर रहते हुए इन्होने राज्यों को देश में मिलाने का कार्य किया जिससे उन्हें के लोह पुरुष की छवि मिली |
  • Sardar Vallabhbhai Patel Jayanti Jeevan Parichay

वल्लभभाई पटेल का प्रारम्भिक जीवन परिचय

वल्लभभाई पटेल एक कृषक परिवार से थे जिसमे चार बेटे थे | एक साधारण मनुष्य की तरह इनके जीवन के भी कुछ लक्ष्य थे | यह पढ़ना चाहते थे, कुछ कमाना चाहते थे और उस कमाई का कुछ हिस्सा जमा करके इंग्लैंड जाकर अपनी पढाई पूरी करना चाहते थे |इन सबमे इन्हें कई परिशानियों का सामना करना पड़ा | पैसे की कमी, घर की जिम्मेदारी इन सभी के बीच वे धीरे-धीरे अपने लक्ष्य की तरफ बढ़ते रहे |शुरुवाती दिनों में इन्हें घर के लोग नाकारा समझते थे | उन्हें लगता था ये कुछ नहीं कर सकते | इन्होने 22 वर्ष की उम्र में मेट्रिक की पढाई पूरी की और कई सालों तक घरवालो से दूर रहकर अपनी वकालत की पढाई की जिसके लिए उन्हें उधार किताबे लेनी पड़ती थी इस दौरान इन्होने नौकरी भी की और परिवार का पालन भी किया | एक साधारण मनुष्य की तरह ही यह जिन्दगी से लड़ते- लड़ते आगे बढ़ते रहे इस बात से बेखबर कि ये देश के लोह पुरुष कहलाने वाले हैं |
इनके जीवन की एक विशेष घटना से इनके कर्तव्यनिष्ठा का अनुमान लगाया जा सकता हैं यह घटना जबकि थी जब इनकी पत्नी बम्बई के हॉस्पिटल में एडमिट थी |विस्तार से पढ़े  वल्लभभाई के जीवन से जुडी घटना कहानी :
कैंसर से पीढित इनकी पत्नी का देहांत हो गया जिसके बाद इन्होने दुसरे विवाह के लिए इनकार कर दिया और अपने बच्चो को सुखद भविष्य देने हेतु मेहनत में लग गए |
इंग्लॅण्ड जाकर इन्होने 36 महीने की पढाई को 30 महीने में पूरा किया उस वक्त इन्होने कॉलेज में टॉप किया |इसके बाद वापस स्वदेश लोट कर अहमदाबाद में एक सफल और प्रसिद्ध बेरिस्टर के रूप कार्य करने लगे |इंग्लैंड से वापस आये थे इसलिए उनकी चल ढाल बदल चुकी थी | वे सूट बूट यूरोपियन स्टाइल में कपड़े पहनने लगे थे | इनका सपना था ये बहुत पैसे कमाये और अपने बच्चो को एक अच्छा भविष्य दे | लेकिन नियति ने इनका भविष्य तय कर रखा था | गाँधी जी के विचारों से प्रेरित होकर इन्होने सामाजिक बुराई के खिलाफ अपनी आवाज उठाई | भाषण के जरिये लोगो को एकत्र किया | इस प्रकार रूचि ना होते हुए भी धीरे-धीरे सक्रीय राजनीती का हिस्सा बन गए |
  • Sardar Vallabhbhai Patel As A Freedom Fighter

स्वतंत्रता संग्राम में वल्लभभाई पटेल का योगदान

स्थानीय कार्य :
गुजरात के रहवासी वल्लभभाई ने सबसे पहले अपने स्थानीय क्षेत्रो में शराब, छुआछूत एवं नारियों के अत्याचार के खिलाफ लड़ाई की | इन्होंने हिन्दू मुस्लिम एकता को बनाये रखने की पुरजोर कोशिश की |

खेड़ा आन्दोलन

1917 में गाँधी जी ने वल्लभभाई पटेल से कहा कि वे खेडा के किसानो को एकत्र करे और उन्हें अंग्रेजो के खिलाफ आवाज उठाने के लिए प्रेरित करे | उन दिनों बस कृषि ही भारत का सबसे बड़ा आय का स्त्रोत थी लेकिन कृषि हमेशा ही प्रकृति पर निर्भर करती आई हैं | वैसा ही कुछ उन दिनों का आलम था | 1917 में जब अधिक वर्षा के कारण किसानो की फसल नष्ट हो गई थी लेकिन फिर भी अंग्रेजी हुकूमत को विधिवत कर देना बाकि था | इस विपदा को देख वल्लभ भाई ने गाँधी जी के साथ मिलकर किसानो को कर ना देने के लिए बाध्य किया और अंतः अंग्रेजी हुकूमत को हामी भरनी पड़ी और यह थी सबसे पहली बड़ी जीत जिसे खेडा आन्दोलन के नाम से याद किया जाता हैं |
इन्होने गाँधी जी के हर आन्दोलन में उनका साथ दिया | इन्होने और इनके पुरे परिवार ने अंग्रेजी कपड़ो का बहिष्कार किया और खादी को अपनाया |

कैसे मिला सरदार पटेल नाम ?(बारडोली सत्याग्रह)

इस बुलंद आवाज नेता वल्लभभाई ने बारडोली में सत्याग्रह का नेतृत्व किया | यह सत्याग्रह 1928 में साइमन कमीशन के खिलाफ किया गया था | इसमें सरकार द्वारा बढ़ाये गए कर का विरोध किया गया और किसान भाइयों को एक देख ब्रिटिश वायसराय को झुकना पड़ा | इस बारडोली सत्याग्रह के कारण पुरे देश में वल्लभभाई पटेल का नाम प्रसिद्द हुआ और लोगो में उत्साह की लहर दौड़ पड़ी | इस आन्दोलन की सफलता के कारण वल्लभ भाई पटेल को बारडोली के लोग सरदार कहने लगे जिसके बाद इन्हें सरदार पटेल के नाम से ख्याति मिलने लगी |
स्थानीय लड़ाई से देश व्यापी आन्दोलन
गाँधी जी की अहिंसा की निति ने इन्हें बहुत ज्यादा प्रभावित किया था और इनके कार्यों ने गाँधी जी पर अमिट छाप थी | इसलिए स्वतंत्रता के लिए किये गए सभी आंदोलन जैसे असहयोग आन्दोलन, स्वराज आन्दोलन, दांडी यात्रा, भारत छोडो आन्दोलन इन सभी में सरदार पटेल की भूमिका अहम् थी | अंग्रेजो की आँखों में खटने वाले स्वतंत्रता सेनानी थे सरदार पटेल |
1923 में जब गाँधी जी जेल में थे | तब इन्होने नागपुर में सत्याग्रह आंदोलन का नेत्रत्व किया |इन्होने अंग्रेजी सरकार द्वारा राष्ट्रीय ध्वज को बंद करने के खिलाफ आवाज उठाई जिसके लिए अलग- अलग प्रान्तों से लोगो को इकट्ठा कर मोर्चा निकाला गया | इस मोर्चे के कारण अंग्रेजी सरकार को झुकना पड़ा और उन्होंने कई कैदियों को जेल से रिहा किया |
इनकी वाक् शक्ति ही इनकी सबसे बड़ी ताकत थी जिस कारण उन्होंने देश के लोगो को संगठित किया | इनके प्रभाव के कारण ही एक आवाज पर आवाम इनके साथ हो चलती थी |

आजादी के पहले एवम बाद में अहम् पद

इनकी लोकप्रियता बढ़ती ही जा रही थी इन्होने लगातार नगर के चुनाव जीते और 1922, 1924 और 1927 में अहमदाबाद के नगर निगम के अध्यक्ष के रूप में चुने गए |1920 के आसपास के दशक में पटेल ने गुजरात कांग्रेस को ज्वाइन किया जिसके बाद वे 1945 तक गुजरात कांग्रेस अध्यक्ष बने रहे  |1932 में इन्हें भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया | इन्हें कांग्रेस में सभी बहुत पसंद करते थे | उस वक्त गाँधी जी, नेहरु जी एवं सरदार पटेल ही नेशनल कांग्रेस के मुख्य बिंदु थे | आजादी के बाद वे देश के गृहमंत्री एवं उपप्रधानमंत्री चुने गए | वैसे सरदार पटेल प्रधानमंत्री के प्रथम दावेदार थे उन्हें कांग्रेस पार्टी के सर्वाधिक वोट मिलने के पुरे आसार थे लेकिन गाँधी जी के कारण उन्होंने स्वयं को इस दौड़ से दूर रखा |
  • Sardar Vallabhbhai Patel Rashtriya Ekikaran Mein Yogdan

आजादी के बाद सरदार पटेल द्वारा किया गया अहम् कार्य

15 अगस्त 1947 के दिन देश आजाद हो गया इस आजादी के बाद देश की हालत बहुत गंभीर थी | पाकिस्तान के अलग होने से कई लोग बेघर थे | उस वक्त रियासत होती थी हर एक राज्य एक स्वतंत्र देश की तरह था जिन्हें भारत में मिलाना बहुत जरुरी थी |यह कार्य बहुत कठिन था कई वर्षो की गुलामी के बाद कोई भी राजा अब किसी भी तरह की आधीनता के लिए तैयार नहीं था लेकिन वल्लभभाई पर सभी को यकीन था उन्होंने ने ही रियासतों को राष्ट्रीय एकीकरण के लिए बाध्य किया और बिना किसी युद्ध के रियासतों को देश में मिलाया | जम्मू कश्मीर, हैदराबाद एवं जूनागढ़ के राजा इस समझौते के लिए तैयार न थे | इनके खिलाफ सैन्यबल का उपयोग करना पड़ा और आखिकार ये रियासते भी भारत में आकर मिल गई | इस प्रकार वल्लभभाई पटेल की कोशिशों के कारण बिना रक्त बहे 560 रियासते भारत में आ मिली | रियासतों को भारत में मिलाने का यह कार्य नम्बर 1947 आजादी के महज कुछ महीनो में ही पूरा किया गया | गाँधी जी ने कहा कि यह कार्य केवल सरदार पटेल ही कर सकते थे | इतिहास से लेकर आज तक इन जैसा व्यक्ति पुरे विश्व में नहीं था जिसने बिना हिंसा के देश एकीकरण का ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया हो | उन दिनों इनकी इस सफलता के चर्चे पुरे विश्व के समाचार पत्रों में थे |इनकी तुलना बड़े-बड़े महान लोगो से की जाने लगी थी |
कहा जाता हैं अगर पटेल प्रधानमंत्री होते तो आज पाकिस्तान, चीन जैसी समस्या इतना बड़ा रूप नहीं लेती | पटेल की सोच इतनी परिपक्व थी कि वे पत्र की भाषा पढ़कर ही सामने वाले के मन के भाव समझ जाते थे | उन्होंने कई बार नेहरु जी को चीन के लिए सतर्क किया लेकिन नेहरु ने इनकी कभी ना सुनी |
  • Vallabhbhai Patel Vs Jawahar Lal Neharu

पटेल एवं नेहरु के बीच अंतर

पटेल एवं नेहरु दोनों गाँधी विचार धारा से प्रेरित थे इसलिए ही शायद एक कमान में थे | वरना तो इन दोनों की सोच में जमीन आसमान का अंतर था | जहाँ पटेल भूमि पर थे, मिट्टी में रचे बसे साधारण व्यक्तित्व के तेजस्वी व्यक्ति थे | वही नेहरु जी अमीर घरानों के नवाब थे, जमीनी हकीकत से दूर, एक ऐसे व्यक्ति जो बस सोचते थे और वही कार्य पटेल करके दिखा देते थे | शैक्षणिक योग्यता हो या व्यवहारिक सोच हो इन सभी में पटेल नेहरु जी से काफी आगे थे | कांग्रेस में नेहरु जी के लिए पटेल एक बहुत बड़ा रोड़ा थे |
  • Sardar Vallabhbhai Patel Death Anniversary

वल्लभभाई पटेल की मृत्यु :

1948 में हुई गाँधी जी की मृत्यु के बाद पटेल को इस बात का गहरा आघात पहुँचा और उन्हें कुछ महीनो बाद हार्ट अटैक हुआ जिससे वे उभर नहीं पाए और 15 दिसम्बर 1950 को इस दुनिया से चले गए |
  • Sardar Vallabhbhai Patel Rashtriya Samman

राष्ट्रीय सम्मान (sardar patel statue):

1991 में इन्हें भारत रत्न का सम्मान दिया गया |इनके नाम से कई शेक्षणिक संस्थायें हैं | हवाईअड्डे को भी इनका नाम दिया गया |
स्टेच्यु ऑफ़ यूनिटी के नाम से सरदार पटेल के 2013में उनके जन्मदिन पर गुजरात में उनका स्मृति स्मारक बनाने की शुरुवात की गई यह स्मारक भरूच (गुजरात) के पास नर्मदा जिले में हैं |
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सरदार वल्लभभाई पटेल पर कविता

लोह पुरुष की ऐसी छवि
ना देखी, ना सोची कभी
आवाज में सिंह सी दहाड़ थी
ह्रदय में कोमलता की पुकार थी 
एकता का स्वरूप जो इसने रचा
देश का मानचित्र पल भर में बदला
गरीबो का सरदार था वो 
दुश्मनों के लिए लोहा था वो 
आंधी की तरह बहता गया
ज्वालामुखी सा धधकता गया 
बनकर गाँधी का अहिंसा का शस्त्र 
महकता गया विश्व में जैसे कोई ब्रहास्त्र 
इतिहास के गलियारे खोजते हैं जिसे 
ऐसे सरदार पटेल अब ना मिलते पुरे विश्व में
सरदार वल्लभभाई पटेल के जीवन परिचय से यह बात सामने आती हैं कि मनुष्य महान बनकर पैदा नहीं होता | उनके प्रारम्भिक जीवन को जानने के बाद हम कह सकते हैं कि यह आप और हम जैसे ही एक व्यक्ति थे जो रूपया पैसा और एक सुरक्षित भविष्य की चाह रखता हैं लेकिन कर्म के पथ पर आगे बढ़ते-बढ़ते बेरिस्टर वल्लभभाई पटेल, सरदार पटेल, लोह पुरुष वल्लभभाई पटेल बन गए |
सरदार पटेल ने राष्ट्रिय एकीकरण कर एकता का एक ऐसा स्वरूप दिखाया जिसके बारे में उस वक्त कोई सोच भी नहीं सकता था | उनके इसी कार्य अवम सोच के कारण उनके जन्म दिवस को राष्ट्रीय एकता दिवस  का नाम दिया गया |
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सरदार वल्लभभाई पटेल अनमोल वचन, नारे, स्लोगन

  • कभी- कभी मनुष्य की अच्छाई उसके मार्ग में बाधक बन जाती हैं कभी- कभी क्रोध ही सही रास्ता दिखाता हैं | क्रोध ही अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने की ताकत देता हैं |
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  • डर का सबसे बड़ा कारण विश्वास में कमी हैं |
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  • सरदार पटेल की अहिंसा की परिभाषा :
“ जिनके पास शस्त्र चलाने का हुनर हैं लेकिन फिर भी वे उसे अपनी म्यान में रखते हैं असल में वे अहिंसा के पुजारी हैं | कायर अगर अहिंसा की बात करे तो वह व्यर्थ हैं | “
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  • जिस काम में मुसीबत होती हैं,उसे ही करने का मजा हैं जो मुसीबत से डरते हैं,वे योद्धा नहीं | हम मुसीबत से नहीं डरते |
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  • फालतू मनुष्य सत्यानाश कर सकता हैं इसलिए सदैव कर्मठ रहे क्यूंकि कर्मठ ही ज्ञानेन्द्रियो पर विजय प्राप्त कर सकता हैं |
यह थे सरदार वल्लभभाई पटेल द्वारा कहे कुछ अनमोल वचन जो हमें एक सफल जीवन का पथ दिखाते हैं | महानत व्यक्ति के बोल महज शब्द जाल नहीं होते उनमे अनुभवों की विशालता एवं गहराई होती हैं जो मनुष्य के जीवन को सही दिशा देती हैं |
Sardar Vallabhbhai Patel Jayanti Essay History  आदि के द्वारा उनके जीवन परिचय पढ़कर आपको कैसा लगा ? ऐसे महान व्यक्तित्व को जानने के बाद आप क्या सोचते हैं हमें जरुर लिखे |

पानी की बचत कैसे करे पर निबंध उपाय पानी बचाओ कविता

by Amar Ujala Now  |  in निबंध at  00:03
जल ही जीवन है, ये हमेशा हम सुनते है, लेकिन मानते कितना है? क्या हम जल की रक्षा जीवन की तरह करते है? क्या हम उसे भी उतनी तब्बजो देते है, जितना किसी इन्सान की जिंदगी को? इन सवाल के जबाब सबके पास ना में ही होंगे| हम सब जानते है कि पानी के बिना हम अपने जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकते| लेकिन फिर भी हम इसे फिजूल में खर्च कर देते है| हमारी प्रथ्वी के 70% भाग जल से डूबा हुआ है लेकिन 1-2 % ही इसमें से उपयोग करने लायक है| हमें जल को बहुत सहेज के रखने की जरुरत है, नहीं तो वह दिन दूर नहीं जब हम एक एक बूँद को तरसेंगे| पानी एक ऐसा धन है जिसे हम सहेज कर रखेंगे तभी हमारी आने वाली पीढ़ी उसे उपयोग कर पायेगी| जल है तो कल है|


पानी की बचत कैसे करे पर निबंध उपाय एवम पानी बचाओं कविता

Pani bachao save water upay essay kavita slogans nibandh in hindi

पानी की बर्बादी को रोकने के लिए हम अपने घर से ही शुरुआत कर सकते है| बस थोड़ीसी समझदारी और एक उठाये हुए कदम के साथ हम अपनी आने वाली पीढ़ी को यह तोहफा दे सकते है|
पानी की बचत कैसे करे और बचाने के तरीके (Pani ki bachat kaise kare ke tareeke)–
  1. नल को खुला ना छोड़े – आप जब भी ब्रश करें, दाढ़ी बनायें, सिंक में बर्तन धोएं, तो जरूरत ना होने पर नल बंद रखे, बेकार का पानी ना बहायें| ऐसा करने से हम 6 लीटर हर एक min में पानी बचा सकते है| नहाते समय भी बाल्टी से पानी को व्यर्थ ना बहायें|
  2. नहाने के लिए शावर की जगह बाल्टी का उपयोग करें| अगर शावर उपयोग भी करें तो छोटे वाले लगायें, जिससे पानी की कम खपत हो| शावर का उपयोग ना करके हम 40-45 लीटर पानी हर 1 min में बचा सकते है|
  3. जहाँ कहीं भी नल लीक करे, उसे तुरंत ठीक करवाएं| नहीं तो उसके नीचे बाल्टी या कटोरा रखें और फिर उस पानी का प्रयोग करें|
  4. लो पॉवर वाली वाशिंग मशीन उपयोग करें, इससे पानी की बचत होती है एवं बिजली भी कम लगती है| वाशिंग मशीन में रोज थोड़े थोड़े कपड़े धोने की जगह इक्कठे करके धोएं|
  5. पोधों में पानी पाइप की जगह वाटर कैन से डालें, इससे बहुत कम पानी उपयोग होता है| पाइप से 1 घंटे में 1000 लीटर पानी तक पानी उपयोग हो जाता है, जो पूरी तरह से पानी का नुकसान है| हो सके तो कपड़े धोने वाले पानी को पोधों पर डालें|
  6. घर में पानी का मीटर लगवाएं| आप जितना पानी उपयोग करेंगे, उसके हिसाब से उसका बिल आएगा| बिल देते समय आपको समझ आएगा कि आपने कितना बर्बाद किया है और फिर आगे से ध्यान रखेंगे|
  7. गीजर से गर्म पानी निकालते समय उसमें पहले ठंडा पानी आता है जिसे हम फेंक देते है| ऐसा नहीं करें, ठन्डे पानी को अलग बाल्टी में भरें, फिर गर्म पानी को दूसरी में| इस पानी को आप दूसरी जगह उपयोग कर सकते है|
  8. फ्लश में भी बहुत अधिक पानी उपयोग होता है, इसलिए ऐसा फ्लश लगवाएं जिसमें पानी का फ़ोर्स कम हो|
  9. नालियां हमेशा साफ रखें, क्यूंकि जब ये चोक हो जाती है तो साफ करने के लिए बहुत पानी को बहाया जाता है| इसलिए पहले से ही साफ सफाई रखें|
  10. पेड़ पोधे लगायें जिससे अच्छी बारिश हो और नदी नाले भर जाएँ|
पानी को बचाने की जरुरत क्यों है?
  • पैसों की बचत के लिए
  • बिजली की बचत के लिए
  • हमारे बचाने से जरूरतमंद के काम आएगा|
जल की रक्षा हमेशा करें, और ऐसा करने के लिए दूसरों को भी प्रेरित करें| हम करेंगे तभी हमारे छोटे भी हमसे सीखेंगे| रास्ते में कभी भी कही पर कोई नल खुला हुआ हो, तो उसे बंद करें, पाइप लाइन फूटी हो तो उसकी complaint करें| आजकल तो हमारे घर में पानी आ जाता है, पानी की कीमत वो लोग समझते है जो 4-5 km पैदल चलकर पानी भरने जाते है| 1-2 बाल्टी के लिए उन्हें घंटो लाइन में खड़े होना पड़ता है| हम उनकी मदद सीधे तौर पर तो नहीं कर सकते| लेकिन कम से कम पानी बचायें, जिससे सही हाथों तक ये पहुँच सके| आज से ही यह शुरुआत अपने घर से करे, यह एक सामाजिक जिम्मेदारी है जो हम सब को साथ मिल कर उठानी चाहिए|
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Save Water Hindi Poem

  • पानी बचाओ कविता 

माना पानी का नही हैं मोल 
पर जीवन के लिए हैं ये अनमोल 
साँसे जहाँ चलती हैं 
वहीँ पानी से पनपती हैं 
यह महज़ एक कविता नहीं 
जीवन की एक सीख हैं 
पानी बचाओ पानी बचाओ 
वर्ना दुखदाई अंत हैं 
जल की कोई सीमा नहीं 
पर पिने को वो योग्य नहीं 
जो जल जीवन बनाता हैं 
वो हर जगह नहीं मिल पाता हैं 
करो इसका मोल अभी 
वर्ना पछताओगे 
पानी बचालो आज सभी 
वर्ना कठिन समस्या पाओगे  
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